IVF की जरूरत कब पड़ती है? जानिए 7 मुख्य कारण और संकेत | 2026 गाइड

IVF की जरूरत कब पड़ती है

आज के समय में कई दंपत्तियों के मन में यह सवाल होता है कि IVF कब करवाना चाहिए और किन परिस्थितियों में यह उपचार आवश्यक हो जाता है। हर दंपत्ति को IVF की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन कुछ विशेष मेडिकल स्थितियों में यह सबसे प्रभावी विकल्प बन जाता है। जब लंबे समय तक प्राकृतिक रूप से गर्भधारण नहीं हो पाता, बार-बार गर्भपात होता है, या मेडिकल रिपोर्ट्स में प्रजनन से जुड़ी गंभीर समस्या सामने आती है, तब डॉक्टर IVF की सलाह दे सकते हैं।

IVF (In Vitro Fertilization) को आम भाषा में “टेस्ट ट्यूब बेबी” प्रक्रिया भी कहा जाता है। इसमें अंडाणु और शुक्राणु को शरीर के बाहर लैब में मिलाकर भ्रूण बनाया जाता है और फिर उसे गर्भाशय में स्थापित किया जाता है।

नीचे हम विस्तार से समझेंगे कि किन मुख्य कारणों में IVF ट्रीटमेंट कब जरूरी है और किन स्थितियों में यह एक सुरक्षित व प्रभावी विकल्प बनता है।

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1. फैलोपियन ट्यूब का बंद होना या क्षतिग्रस्त होना

प्राकृतिक गर्भधारण की प्रक्रिया में फैलोपियन ट्यूब (Fallopian Tubes) सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यह वह स्थान है जहाँ पुरुष के शुक्राणु और महिला का अंडा आपस में मिलते हैं और ‘निषेचन’ (Fertilization) की प्रक्रिया पूरी होती है।

यह स्थिति चिंताजनक क्यों है? जब ये ट्यूब्स किसी कारणवश बंद (Block) या क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, तो अंडा और शुक्राणु एक-दूसरे तक नहीं पहुँच पाते। ऐसी स्थिति में गर्भधारण करना प्राकृतिक रूप से लगभग असंभव हो जाता है।

ट्यूब ब्लॉक होने के मुख्य कारण:

  • पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (PID): प्रजनन अंगों में होने वाला पुराना संक्रमण।
  • पिछली सर्जरी: पेट या अपेंडिक्स की किसी पिछली सर्जरी के कारण ट्यूब्स में निशान (Scarring) पड़ जाना।
  • ट्यूबरकुलोसिस (TB): भारत में ट्यूबरकुलोसिस ट्यूब ब्लॉक होने का एक बहुत ही सामान्य कारण है।
  • एक्टोपिक प्रेगनेंसी: पुरानी एक्टोपिक प्रेगनेंसी (जब बच्चा ट्यूब में ठहर जाता है) के कारण भी ट्यूब डैमेज हो सकती हैं।

IVF यहाँ कैसे काम करता है? IVF प्रक्रिया उन महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जिनकी ट्यूब्स ब्लॉक हैं। चूँकि इस तकनीक में हम अंडों को सीधे अंडाशय (Ovaries) से बाहर निकालते हैं और लैब में शुक्राणुओं के साथ मिलाते हैं, इसलिए इसमें फैलोपियन ट्यूब की कोई भूमिका नहीं रहती। तैयार भ्रूण को सीधे गर्भाशय (Uterus) में डाल दिया जाता है, जिससे ब्लॉकेज की समस्या पूरी तरह बाईपास हो जाती है।

2. पुरुष बांझपन (Male Infertility Factors)

गर्भधारण के लिए केवल महिला का स्वस्थ होना काफी नहीं है; पुरुष के शुक्राणुओं (Sperms) की गुणवत्ता, संख्या और गतिशीलता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। जब प्राकृतिक रूप से गर्भधारण नहीं हो पाता, तो इसका एक बड़ा कारण पुरुष बांझपन हो सकता है।

पुरुष बांझपन के मुख्य कारण और IVF की भूमिका:

  • शुक्राणुओं की कम संख्या (Low Sperm Count/Oligospermia): यदि वीर्य (Semen) में शुक्राणुओं की संख्या सामान्य से बहुत कम है, तो अंडे तक पहुँचने और उसे निषेचित करने की संभावना कम हो जाती है।
  • कम गतिशीलता (Low Motility/Asthenozoospermia): कभी-कभी शुक्राणुओं की संख्या तो ठीक होती है, लेकिन वे सही दिशा में या तेजी से तैर नहीं पाते। ऐसे में वे महिला के गर्भाशय के माध्यम से अंडे तक का सफर तय नहीं कर पाते।
  • असामान्य बनावट (Abnormal Morphology): यदि शुक्राणु का आकार सही नहीं है, तो वह अंडे की बाहरी परत को नहीं भेद पाता।
  • अजोस्पर्मिया (Azoospermia): यह वह स्थिति है जहाँ वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या शून्य होती है। ऐसे मामलों में TESA/PESA तकनीक के जरिए सीधे वृषण (Testicles) से शुक्राणु निकाले जाते हैं और फिर IVF किया जाता है।

IVF और ICSI: पुरुष बांझपन का सबसे सटीक समाधान जब शुक्राणुओं की गुणवत्ता बहुत खराब होती है, तो साधारण IVF के बजाय ICSI (Intracytoplasmic Sperm Injection) तकनीक का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में एक माइक्रोस्कोप के नीचे, सबसे स्वस्थ और बेहतरीन शुक्राणु का चुनाव किया जाता है और उसे एक विशेष सुई के माध्यम से सीधे अंडे के अंदर इंजेक्ट कर दिया जाता है।

एंडोमेट्रियोसिस महिलाओं में प्रजनन क्षमता को प्रभावित करने वाली एक जटिल और अक्सर दर्दनाक स्थिति है। यह तब होती है जब गर्भाशय के अंदर पाई जाने वाली परत (Endometrium) जैसी कोशिकाएं गर्भाशय के बाहर, जैसे कि अंडाशय (Ovaries), फैलोपियन ट्यूब या पेल्विक टिशू पर बढ़ने लगती हैं।

यह गर्भधारण में बाधा कैसे डालती है? एंडोमेट्रियोसिस कई तरीकों से इनफर्टिलिटी का कारण बनती है:

  • अंगों का आपस में चिपकना (Adhesions): यह बीमारी अंगों के बीच निशान (Scars) पैदा कर देती है, जिससे अंडाशय और ट्यूब आपस में चिपक सकते हैं, जिससे अंडे का बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है।
  • अंडे की गुणवत्ता (Egg Quality): यह अंडाशय के वातावरण को प्रभावित करती है, जिससे अंडों की संख्या और उनकी क्वालिटी कम हो सकती है।
  • इंफ्लेमेशन (सूजन): शरीर में होने वाली पुरानी सूजन भ्रूण के गर्भाशय में प्रत्यारोपित (Implantation) होने की प्रक्रिया में बाधा डाल सकती है।

IVF यहाँ सबसे बेहतर विकल्प क्यों है? एंडोमेट्रियोसिस से जूझ रही महिलाओं के लिए IVF को ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ उपचार माना जाता है।

  1. सीधा समाधान: चूँकि एंडोमेट्रियोसिस अक्सर ट्यूब्स के काम को बाधित करता है, IVF में हम अंडों को सीधे अंडाशय से निकालकर लैब में निषेचित करते हैं, जिससे क्षतिग्रस्त अंगों की भूमिका खत्म हो जाती है।
  2. बेहतर सफलता दर: दवाइयों या छोटी सर्जरी के मुकाबले एंडोमेट्रियोसिस के मरीजों में IVF की सफलता दर काफी अधिक देखी गई है।
  3. समय की बचत: एंडोमेट्रियोसिस उम्र के साथ बढ़ सकती है, इसलिए विशेषज्ञ समय रहते IVF की सलाह देते हैं ताकि अंडों की गुणवत्ता बनी रहे।

3. PCOS या ओव्यूलेशन की समस्या (PCOS & Ovulation Disorders)

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) महिलाओं में इनफर्टिलिटी का सबसे प्रमुख कारण बनकर उभरा है। एक शोध के अनुसार, भारत में लगभग 20% प्रजनन आयु की महिलाएं इस समस्या से जूझ रही हैं।

PCOS गर्भधारण को कैसे कठिन बनाता है?

  • अनियमित ओव्यूलेशन (Anovulation): PCOS में हार्मोनल असंतुलन के कारण अंडाशय (Ovaries) हर महीने अंडा रिलीज नहीं कर पाते। जब अंडा ही बाहर नहीं आएगा, तो निषेचन (Fertilization) संभव नहीं है।
  • अंडों की गुणवत्ता: इस स्थिति में शरीर में पुरुष हार्मोन (Androgens) का स्तर बढ़ जाता है, जो अंडों की मैच्योरिटी और उनकी क्वालिटी को प्रभावित करता है।
  • हार्मोनल इम्बैलेंस: LH और FSH हार्मोन्स का बिगड़ा हुआ अनुपात गर्भधारण की संभावना को कम कर देता है।

IVF यहाँ कब और क्यों सबसे अच्छा विकल्प है? अक्सर PCOS के मरीजों का इलाज जीवनशैली में बदलाव और ओव्यूलेशन बढ़ाने वाली दवाओं (जैसे Clomiphene) से शुरू किया जाता है। लेकिन IVF की जरूरत तब पड़ती है जब:

  1. दवाओं का बेअसर होना: यदि 3 से 6 महीने तक दवाओं और IUI के बाद भी कंसीव नहीं हो रहा हो।
  2. OHSS का नियंत्रण: अनुभवी विशेषज्ञ IVF के दौरान दवाओं की सटीक खुराक तय करते हैं ताकि ओवेरियन हाइपरस्टिम्यूलेशन सिंड्रोम (OHSS) के जोखिम को कम किया जा सके।
  3. बेहतरीन सफलता दर: अच्छी बात यह है कि PCOS वाली महिलाओं में अंडों की संख्या (Egg Reserve) बहुत अच्छी होती है, इसलिए IVF के माध्यम से उनके सफल होने की संभावना सामान्य से अधिक रहती है।

4. पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS/PCOD)

PCOS (Polycystic Ovary Syndrome) महिलाओं में होने वाला एक हार्मोनल विकार है जो सीधे उनके प्रजनन तंत्र (Reproductive System) को प्रभावित करता है। आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर 5 में से 1 महिला इस समस्या से प्रभावित है।

PCOS गर्भधारण को कैसे कठिन बनाता है?

  • अनियमित ओव्यूलेशन (Anovulation): PCOS में महिला के शरीर में ‘एंड्रोजन’ (पुरुष हार्मोन) का स्तर बढ़ जाता है, जिससे अंडे समय पर विकसित नहीं हो पाते या अंडाशय से बाहर नहीं निकल पाते। जब अंडा ही रिलीज नहीं होगा, तो गर्भधारण संभव नहीं है।
  • अंडों की गुणवत्ता: हार्मोनल असंतुलन के कारण अंडों की क्वालिटी प्रभावित हो सकती है, जिससे निषेचन (Fertilization) में दिक्कत आती है।
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस: कई बार PCOS वाली महिलाओं में इंसुलिन का स्तर अधिक होता है, जो गर्भपात (Miscarriage) के जोखिम को बढ़ा सकता है।

IVF यहाँ कब और क्यों जरूरी है? अक्सर PCOS के मरीजों का इलाज जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes) और ओव्यूलेशन बढ़ाने वाली दवाओं से शुरू किया जाता है। लेकिन IVF की जरूरत तब पड़ती है जब:

  1. दवाओं का असर न होना: यदि 3-6 महीने तक ओव्यूलेशन इंडक्शन की दवाओं और IUI के बाद भी सफलता न मिले।
  2. OHSS का जोखिम कम करना: अनुभवी फर्टिलिटी विशेषज्ञ IVF प्रक्रिया के दौरान दवाओं की खुराक को नियंत्रित करके अंडों की संख्या और गुणवत्ता का सही तालमेल बिठाते हैं।
  3. उच्च सफलता दर: PCOS वाली महिलाओं में आमतौर पर अंडों की संख्या अच्छी होती है, इसलिए IVF के जरिए उनके सफल गर्भधारण की संभावना बहुत अधिक रहती है।

5. उम्र और घटता ओवेरियन रिजर्व (Low AMH)

महिलाओं की प्रजनन क्षमता में ‘समय’ सबसे महत्वपूर्ण कारक है। पुरुषों के विपरीत, महिलाएं एक सीमित संख्या में अंडों के साथ पैदा होती हैं। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, इन अंडों की संख्या और गुणवत्ता (Quality) दोनों कम होने लगती हैं।

AMH (Anti-Mullerian Hormone) क्या है? AMH एक ब्लड टेस्ट है जो यह बताता है कि महिला के अंडाशय में कितने अंडे बचे हैं (इसे ‘ओवेरियन रिजर्व’ कहा जाता है)।

  • High AMH: अच्छे एग रिजर्व का संकेत।
  • Low AMH (1.0 ng/ml से कम): कम होते अंडों का संकेत।

IVF की जरूरत यहाँ क्यों पड़ती है?

  1. समय की कमी: अगर AMH लेवल कम है, तो हर बीतता महीना प्राकृतिक रूप से गर्भधारण की संभावना को कम कर देता है। ऐसे में डॉक्टर समय बर्बाद करने के बजाय सीधे IVF की सलाह देते हैं।
  2. गुणवत्ता का मुद्दा: 35 वर्ष की आयु के बाद अंडों में ‘क्रोमोसोमल असामान्यताएं’ बढ़ने लगती हैं, जिससे गर्भपात (Miscarriage) का खतरा बढ़ जाता है। IVF में हम सबसे स्वस्थ भ्रूण का चुनाव कर सकते हैं।
  3. डोनर एग का विकल्प: यदि ओवेरियन रिजर्व पूरी तरह खत्म हो चुका है, तो IVF के माध्यम से ‘डोनर एग’ का उपयोग करके एक महिला मां बनने का सुख प्राप्त कर सकती है।

कब सचेत हो जाना चाहिए?

  • यदि आपकी उम्र 35 वर्ष से अधिक है और आप 6 महीने से कोशिश कर रही हैं।
  • यदि आपकी मासिक धर्म चक्र (Periods) छोटा होता जा रहा है।
  • यदि आपकी पिछली कोई डिम्बग्रंथि सर्जरी (Ovarian Surgery) हुई है।

6. अनुवांशिक विकार (Genetic Disorders)

कई बार गर्भधारण न हो पाने या बार-बार गर्भपात (Miscarriage) होने का कारण शारीरिक नहीं, बल्कि अनुवांशिक (Genetic) होता है। यदि माता या पिता में से किसी को कोई ऐसी बीमारी है जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलती है, तो IVF केवल बच्चा पैदा करने का जरिया नहीं, बल्कि एक ‘स्वस्थ बच्चा’ पैदा करने का एकमात्र समाधान बन जाता है।

IVF यहाँ कैसे मदद करता है? आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में IVF के साथ PGT (Pre-implantation Genetic Testing) तकनीक का उपयोग किया जाता है। इसकी प्रक्रिया इस प्रकार है:

  1. भ्रूण निर्माण: लैब में महिला के अंडे और पुरुष के शुक्राणु से कई भ्रूण तैयार किए जाते हैं।
  2. बायोप्सी: भ्रूण को गर्भाशय में डालने से पहले उसकी एक छोटी सी कोशिका की जांच की जाती है।
  3. स्वस्थ भ्रूण का चुनाव: जांच में देखा जाता है कि किस भ्रूण में कोई आनुवंशिक दोष (जैसे डाउन सिंड्रोम या थैलेसीमिया) नहीं है।
  4. सुरक्षित ट्रांसफर: केवल उसी भ्रूण को महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है जो पूरी तरह स्वस्थ और सामान्य है।

किन परिस्थितियों में यह जरूरी है?

  • बार-बार गर्भपात: यदि प्रेगनेंसी बार-बार पहले 3 महीनों में ही खत्म हो रही है।
  • पारिवारिक इतिहास: यदि परिवार में थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया या सिस्टिक फाइब्रोसिस जैसी बीमारियां हैं।
  • देर से प्रेगनेंसी: 35-40 की उम्र के बाद अंडों में क्रोमोसोमल असामान्यताएं (Chromosomal Abnormalities) बढ़ने का खतरा रहता है।
  • पिछला बच्चा अस्वस्थ होना: यदि पहले बच्चे में कोई जन्मजात विकार रहा हो।

7. अनएक्सप्लेंड इनफर्टिलिटी (Unexplained Infertility)

यह एक ऐसी स्थिति है जो किसी भी जोड़े के लिए सबसे ज्यादा मानसिक तनाव और भ्रम पैदा करने वाली होती है। ‘अनएक्सप्लेंड इनफर्टिलिटी’ का मतलब है कि डॉक्टर ने महिला के ओव्यूलेशन, ट्यूब्स और गर्भाशय की जांच कर ली है, पुरुष के शुक्राणुओं की रिपोर्ट भी सामान्य है, लेकिन फिर भी गर्भधारण नहीं हो पा रहा है।

यह क्यों होता है? हालांकि रिपोर्ट्स सामान्य दिखती हैं, लेकिन सूक्ष्म स्तर (Microscopic level) पर कुछ ऐसी बाधाएं हो सकती हैं जिन्हें साधारण टेस्ट नहीं पकड़ पाते, जैसे:

  • अंडे और शुक्राणु का न मिलना: कभी-कभी अंडा और शुक्राणु एक-दूसरे के संपर्क में तो आते हैं, लेकिन निषेचन (Fertilization) की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती।
  • भ्रूण का विकास न होना: निषेचन तो हो जाता है, लेकिन भ्रूण गर्भाशय में प्रत्यारोपित (Implant) होने लायक विकसित नहीं हो पाता।
  • एग शेल (Egg Shell) का सख्त होना: कभी-कभी अंडे की बाहरी परत इतनी सख्त होती है कि शुक्राणु उसे भेद नहीं पाता।

IVF यहाँ एक ‘गेम चेंजर’ क्यों है? जब बांझपन का कोई स्पष्ट कारण नहीं मिलता, तो IVF केवल एक इलाज नहीं बल्कि एक ‘डायग्नोस्टिक टूल’ (जांच का जरिया) भी बन जाता है:

  1. असली कारण का पता चलना: लैब में जब हम अंडे और शुक्राणु को मिलाते हैं, तो हमें पहली बार यह पता चलता है कि क्या वे वाकई निषेचित हो रहे हैं या नहीं।
  2. प्रक्रिया को आसान बनाना: यदि शुक्राणु अंडे को नहीं भेद पा रहा, तो ICSI के जरिए उसे सीधे इंजेक्ट किया जाता है।
  3. सफलता की निश्चितता: IUI जैसे छोटे उपचारों में सफलता की दर 10-15% होती है, जबकि अनएक्सप्लेंड इनफर्टिलिटी के मामलों में IVF की सफलता दर 50-70% तक हो सकती है।

IVF शुरू करने से पहले क्या करें?

IVF की प्रक्रिया शुरू करना शारीरिक, भावनात्मक और आर्थिक रूप से एक बड़ा कदम होता है। इसकी सफलता की संभावना बढ़ाने और तनाव कम करने के लिए आपको कुछ जरूरी तैयारियां पहले से कर लेनी चाहिए।

यहाँ कुछ मुख्य कदम दिए गए हैं जो आपको IVF साइकिल शुरू करने से पहले उठाने चाहिए:

1. अपनी जीवनशैली में सुधार (Lifestyle Changes)

IVF की सफलता आपके अंडों और शुक्राणुओं की गुणवत्ता पर निर्भर करती है।

  • स्वस्थ आहार: अपनी डाइट में प्रोटीन, हरी सब्जियां, फल और ओमेगा-3 फैटी एसिड शामिल करें। प्रोसेस्ड फूड और ज्यादा चीनी से बचें।
  • वजन नियंत्रित करें: बहुत अधिक या बहुत कम वजन हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ सकता है। एक संतुलित BMI (Body Mass Index) सफलता की दर बढ़ाता है।
  • बुरी आदतों का त्याग: धूम्रपान (Smoking), शराब और कैफीन (चाय/कॉफी) का अधिक सेवन तुरंत बंद कर दें, क्योंकि ये प्रजनन क्षमता को नुकसान पहुँचाते हैं।

2. जरूरी मेडिकल टेस्ट (Pre-IVF Testing)

डॉक्टर उपचार शुरू करने से पहले कुछ बुनियादी टेस्ट करवाते हैं ताकि आपकी स्थिति का पता चल सके:

  • महिला के लिए: AMH (एग रिजर्व देखने के लिए), अल्ट्रासाउंड, और गर्भाशय की जांच।
  • पुरुष के लिए: सीमेन एनालिसिस (Semen Analysis) ताकि शुक्राणुओं की संख्या और गति देखी जा सके।
  • संक्रामक रोग: एचआईवी (HIV), हेपेटाइटिस और सिफलिस जैसे टेस्ट दोनों पार्टनर्स के लिए अनिवार्य होते हैं।

3. प्रीनेटल विटामिन्स शुरू करें (Start Supplements)

डॉक्टर की सलाह पर कम से कम 2-3 महीने पहले से फोलिक एसिड (Folic Acid) और अन्य जरूरी सप्लीमेंट्स लेना शुरू करें। यह भ्रूण के विकास में मदद करता है और जन्म दोषों के जोखिम को कम करता है।

4. भावनात्मक और मानसिक तैयारी (Mental Wellness)

IVF एक रोलरकोस्टर की तरह हो सकता है।

  • तनाव कम करें: ध्यान (Meditation), योग या अपनी पसंदीदा हॉबी के लिए समय निकालें।
  • एक-दूसरे का साथ: पति-पत्नी आपस में खुलकर बात करें और एक-दूसरे का सहारा बनें।
  • काउंसलिंग: यदि जरूरत महसूस हो, तो किसी प्रोफेशनल फर्टिलिटी काउंसलर से बात करें।

5. वित्तीय योजना (Financial Planning)

IVF का खर्च काफी हो सकता है। प्रक्रिया शुरू करने से पहले:

  • ट्रीटमेंट पैकेज की पूरी जानकारी लें।
  • दवाओं और अतिरिक्त प्रक्रियाओं (जैसे ICSI या एम्ब्रियो फ्रीजिंग) के छिपे हुए खर्चों के बारे में पूछें।
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निष्कर्ष

निःसंतानता या बांझपन का सामना करना किसी भी जोड़े के लिए भावनात्मक रूप से थकाने वाला हो सकता है। लेकिन आज के समय में IVF (In-Vitro Fertilization) ने उन बाधाओं को दूर कर दिया है जिन्हें पहले नामुमकिन माना जाता था। चाहे समस्या ब्लॉक फैलोपियन ट्यूब की हो, पुरुष बांझपन की या फिर बढ़ती उम्र की—विज्ञान के पास हर चुनौती का समाधान मौजूद है।

याद रखिए, IVF की जरूरत पड़ना किसी कमजोरी का संकेत नहीं है, बल्कि यह आपके माता-पिता बनने के सपने को सच करने का एक आधुनिक और सुरक्षित रास्ता है। सही समय पर लिया गया फैसला और एक अनुभवी फर्टिलिटी विशेषज्ञ का मार्गदर्शन आपकी सफलता की संभावनाओं को कई गुना बढ़ा सकता है।

यदि आप भी लंबे समय से कोशिश कर रहे हैं और परिणाम नहीं मिल रहे, तो घबराएं नहीं। अपनी रिपोर्ट्स के साथ एक विशेषज्ञ से मिलें और अपनी खुशियों की दिशा में पहला कदम बढ़ाएं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. IVF कब करवाना चाहिए?

उत्तर: यदि आपकी उम्र 35 से कम है और आप 1 साल से प्रयास कर रहे हैं, या आपकी उम्र 35 से अधिक है और 6 महीने से गर्भधारण नहीं हो पा रहा है, तो आपको फर्टिलिटी विशेषज्ञ से मिलना चाहिए। इसके अलावा, यदि ट्यूब ब्लॉक हैं या गंभीर पुरुष बांझपन है, तो तुरंत IVF पर विचार करना चाहिए।

Q2. क्या IVF से पैदा हुए बच्चे सामान्य होते हैं?

उत्तर: हाँ, बिल्कुल। IVF से जन्मे बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से उतने ही सामान्य और स्वस्थ होते हैं जितने कि प्राकृतिक रूप से जन्मे बच्चे। इस प्रक्रिया का बच्चे के स्वास्थ्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।

Q3. क्या IVF प्रक्रिया में दर्द होता है?

उत्तर: नहीं, IVF की मुख्य प्रक्रिया जैसे ‘एग रिट्रीवल’ हल्की बेहोशी (Sedation) में की जाती है, जिससे दर्द का अहसास नहीं होता। भ्रूण स्थानांतरण (Embryo Transfer) की प्रक्रिया एक साधारण अल्ट्रासाउंड जैसी होती है, जिसमें किसी एनेस्थीसिया की भी जरूरत नहीं पड़ती।

Q4. IVF की सफलता दर (Success Rate) क्या है?

उत्तर: IVF की सफलता दर महिला की उम्र, लाइफस्टाइल और क्लिनिक की तकनीक पर निर्भर करती है। सामान्यतः, युवा महिलाओं में सफलता दर 60% से 80% तक हो सकती है। आधुनिक तकनीकें जैसे ICSI और PGT इस दर को और बढ़ा देती हैं।

Q5. क्या IVF के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है?

उत्तर: नहीं, यह एक ‘डे-केयर’ प्रक्रिया है। एग रिट्रीवल के बाद आपको कुछ ही घंटों में छुट्टी मिल जाती है। इसके लिए अस्पताल में रात भर रुकने की आवश्यकता नहीं होती।

Q6. क्या पहली बार में ही IVF सफल हो जाता है?

उत्तर: कई मामलों में पहली बार में सफलता मिल जाती है, लेकिन कुछ जोड़ों को 2 या 3 साइकिल की आवश्यकता हो सकती है। यह आपकी शारीरिक स्थिति और भ्रूण की गुणवत्ता पर निर्भर करता है।

Q7. जयपुर में IVF का खर्च कितना है?

उत्तर: जयपुर में IVF का खर्च आमतौर पर ₹1,00,000 से ₹2,50,000 के बीच हो सकता है। यह दवाओं, लैब की तकनीक और आवश्यक अतिरिक्त प्रक्रियाओं (जैसे एम्ब्रियो फ्रीजिंग) पर निर्भर करता है।

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